एक लाइन में जवाब

हाँ। फास्टिंग के दौरान सैंपल लेने तक सादा पानी पीने की पूरी अनुमति है। भारत के डायबिटीज़ दिशानिर्देश फास्टिंग का मतलब बताते हैं: 8 से 12 घंटे तक कोई कैलोरी नहीं। सादे पानी में कोई कैलोरी नहीं होती, इसलिए यह नियम तोड़ता नहीं। अमेरिकी सरकारी मार्गदर्शन भी साफ़ लिखता है कि फास्टिंग में पानी के सिवा कुछ न लें: पानी छूट है, चोरी-छिपे की गई ढील नहीं।

यानी अगर आप सोच रहे हैं कि ब्लड टेस्ट से पहले पानी पी सकते हैं या नहीं, तो जवाब हाँ है, और यह साफ़ कहना ज़रूरी है क्योंकि यह उलझन बहुत आम है। एक अध्ययन में लैब पहुँचे 150 लोगों में से सिर्फ़ 39% फास्टिंग की सही परिभाषा बता पाए, और आधे से ज़्यादा को कोई निर्देश मिला ही नहीं था। अगर आपको किसी ने नहीं बताया, तो आप बहुमत में हैं।

पानी फ़ायदा क्यों करता है

पहली वजह व्यावहारिक है। पानी पीने से नसें भरी रहती हैं, और सैंपल लेने वाले को नस आसानी से मिलती है, चाहे सैंपल लैब में दें या घर पर। नस से खून लेने की यूरोपीय सिफ़ारिश मरीज़ की तैयारी को सैंपल की गुणवत्ता का हिस्सा मानती है, सिर्फ़ शिष्टाचार नहीं।

दूसरी वजह ख़ुद नतीजों से जुड़ी है। शरीर में पानी कम हो तो खून का तरल हिस्सा घटता है, और कुछ वैल्यू बनावटी रूप से ऊँची आ सकती हैं। एक अध्ययन में कसरत से शरीर का पानी इधर-उधर किया गया, तो प्लाज़्मा घटने के साथ हीमोग्लोबिन, हीमेटोक्रिट और एल्ब्यूमिन बढ़ गए। एहतियात के नाम पर 12 घंटे पानी छोड़ देना ठीक उल्टा असर करता है।

कौन सा पानी चलेगा, कौन सा नहीं

सादा पानी। नल का हो या बोतल का, ठंडा हो या गुनगुना: अगर उसमें कुछ मिलाया नहीं गया, तो चलेगा।

बाक़ी सब फास्टिंग तोड़ता है, वे पेय भी जो पानी जैसे लगते हैं। जूस, कॉफ़ी और सोडा के बारे में मार्गदर्शन साफ़ है, और यही नियम दूसरे पेयों पर भी लागू होता है, क्योंकि उनमें मौजूद चीज़ें खून में पहुँचकर नतीजे बदल सकती हैं। इसमें नींबू पानी, शहद-नींबू वाला गुनगुना पानी, नारियल पानी, ORS या इलेक्ट्रोलाइट पाउडर और डाइट सोडा भी आते हैं।

बिना दूध-चीनी की कॉफ़ी या चाय सबसे आम गलती है, और छोटी नहीं: एक नियंत्रित परीक्षण में खाने से एक घंटा पहले कैफ़ीन वाली कॉफ़ी से शुगर का उछाल, डिकैफ़ के मुकाबले, 147% से 216% ज़्यादा था।

  1. सादा पानी: हाँफास्टिंग में अकेला पेय जिसकी अनुमति है, सैंपल के पल तक।
  2. चाय और कॉफ़ी: नहींदूध वाली, काली, डिकैफ़ या हर्बल, सब सैंपल के बाद।
  3. नींबू, नारियल, ORS: नहींनींबू, शहद, नारियल पानी, इलेक्ट्रोलाइट पाउडर और डाइट सोडा, सबमें कुछ न कुछ मिला है।
  4. गम, सौंफ, सिगरेट: नहींये पेय नहीं हैं, पर फास्टिंग में टालने वाली चीज़ों की सूची में हैं।

कितना पानी और कब पिएँ

कोई लक्ष्य नहीं है। जितना आमतौर पर पीते हैं उतना पीजिए, सुबह अपॉइंटमेंट से पहले एक-दो गिलास भी। आपको पानी भरना नहीं है, बस रात भर बिना पानी के रहने के बाद सूखे गले से नहीं पहुँचना है।

फास्टिंग शुगर के लिए अमेरिकी डायबिटीज़ मार्गदर्शन फास्टिंग को कम से कम 8 घंटे बताता है, जिसमें पानी के घूँट की अनुमति है, और जाँच आमतौर पर सुबह होती है। सामान्य रूप से पानी पीना इसमें पूरी तरह फ़िट है; सुई से ठीक पहले ज़बरदस्ती गिलास भरने की ज़रूरत नहीं।

सुबह प्यास लगे तो पी लीजिए। फास्टिंग वाली सुबह की प्यास एक गिलास पानी का इशारा है, सहनशक्ति की परीक्षा नहीं।

क्या हर ब्लड टेस्ट से पहले पानी पी सकते हैं?

हाँ। अगर आपकी पर्ची पर कोई फास्टिंग वाली जाँच नहीं है, तो आप सामान्य रूप से खा-पी सकते हैं, पानी भी। HbA1c इसका आम उदाहरण है: उससे पहले खाने-पीने की अनुमति है।

लोग यह भी पूछते हैं: डायबिटीज़ या कोलेस्ट्रॉल की फास्टिंग जाँच से पहले पानी पी सकते हैं? जाँच के हिसाब से जवाब नहीं बदलता। शुगर, लिपिड प्रोफाइल और पर्ची की बाक़ी सब जाँचों के लिए सादा पानी ठीक है।

अगर किसी ख़ास जाँच के साथ पानी सीमित करने का लिखित निर्देश मिले, तो उसे मानिए, क्योंकि वह आपके सैंपल के लिए लिखा गया है। वरना ब्लड टेस्ट की सुबह समस्या पानी नहीं, पानी की कमी है।

कसरत, चाय और सुबह के बाक़ी सवाल

कसरत: आज छोड़ दीजिए। अमेरिकी मार्गदर्शन फास्टिंग में कसरत को टालने की सलाह देता है, और भारी कसरत शरीर का पानी इधर-उधर करती है, जो ऊपर के अध्ययन में हीमोग्लोबिन और एल्ब्यूमिन जैसी वैल्यू बढ़ाने के लिए काफ़ी था। सुबह की सैर ठीक है, दौड़कर लैब मत पहुँचिए।

चाय, चाहे दूध वाली हो, ग्रीन टी हो या हर्बल, पानी नहीं है, और न ही इलायची या सौंफ। सिगरेट-बीड़ी भी सैंपल के बाद।

समय: फास्टिंग वाली जाँच आमतौर पर सुबह होती है, जिससे फास्टिंग का ज़्यादातर हिस्सा नींद में निकल जाता है और पानी का सवाल आसान हो जाता है।

दवा और पानी

डॉक्टर ने कुछ और न कहा हो तो रोज़ की दवा पानी के साथ लीजिए। रोज़ की दवाएँ फास्टिंग जाँच से पहले लेनी हैं या नहीं, यह ख़ुद तय करने के बजाय डॉक्टर से पूछिए।

यहाँ समस्या पानी कभी नहीं होता; ख़ुद से इलाज बदलना होता है। अगर आप इंसुलिन या सल्फ़ोनिलयूरिया जैसी शुगर की गोली लेते हैं, तो पहले से पूछ लीजिए कि उस सुबह क्या करना है, क्योंकि खाली पेट रहते हुए ये दवाएँ हमेशा की तरह लेने से शुगर बहुत नीचे गिर सकती है।